दिलों से ग़म मिटाता है मुहम्मद नाम ऐसा है / Dilon Se Gham Mitata Hai Muhammad Naam Aisa Hai
दिलों से ग़म मिटाता है, मुहम्मद नाम ऐसा है नगर उजड़े बसाता है, मुहम्मद नाम ऐसा है उन्हीं के नाम से पाई फ़क़ीरों ने शहंशाही ख़ुदा से भी मिलाता है, मुहम्मद नाम ऐसा है उन्हीं के ज़िक्र से रौशन रुतें फिर लौट आती हैं नसीबों को जगाता है, मुहम्मद नाम ऐसा है दुरूदों की महक से महफ़िलें आबाद रहती हैं मेरी ना'तें सजाता है, मुहम्मद नाम ऐसा है मोहब्बत के कँवल खिलते हैं उन को याद करने से बड़ी ख़ुश्बूएँ लाता है, मुहम्मद नाम ऐसा है मदद हासिल है मुझ को हर घड़ी शाह-ए-मदीना की मेरी बिगड़ी बनाता है, मुहम्मद नाम ऐसा है मैं, फ़ख़्री ! फ़िक्र-ए-दुनिया आख़िरत सब भूल जाता हूँ मुझे जब याद आता है, मुहम्मद नाम ऐसा है शायर: ज़ाहिद फ़ख़री ना'त-ख़्वाँ: अफ़ज़ल नोशाही मीलाद रज़ा क़ादरी मुहम्मद हुसैन नक़्शबंदी dilo.n se Gam miTaata hai, muhammad naam aisa hai nagar uj.De basaata hai, muhammad naam aisa hai unhi.n ke naam se paai faqeero.n ne shahanshaahi KHuda se bhi milaata hai, muhammad naam aisa hai unhi.n ke zikr se raushan rute.n phir lauT aati hai.n naseebo.n ko jagaata hai, muhammad naam ...